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इंस्पेक्टर अरुण राय हत्याकांड में बड़ा मोड़! आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को हाईकोर्ट से मिली जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर की जमानत याचिका, 383 पन्नों की चार्जशीट और 39 गवाहों के बीच अब जिला अदालत में जारी रहेगा ट्रायल।

जालौन के चर्चित इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। करीब सात महीने से जेल में बंद आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि अदालत ने केवल जमानत दी है, मामले का ट्रायल अभी जारी रहेगा और अंतिम फैसला साक्ष्यों के आधार पर होगा।

जालौन: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित कुठौंद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड में शुक्रवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में हत्या की आरोपी महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। करीब सात महीने से न्यायिक हिरासत में बंद मीनाक्षी शर्मा की अब जमानत की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि हाईकोर्ट के इस आदेश से मुकदमे का ट्रायल प्रभावित नहीं होगा और जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई पहले की तरह जारी रहेगी।
यह मामला 5 दिसंबर 2025 का है। उस दिन जालौन के कुठौंद थाने में तैनात तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की सरकारी पिस्टल से गोली लगने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।
घटना के अगले दिन इंस्पेक्टर अरुण राय की पत्नी माया राय की तहरीर पर महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने 7 दिसंबर 2025 को मीनाक्षी शर्मा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। बाद में सुरक्षा कारणों के चलते उनका स्थानांतरण झांसी जिला जेल कर दिया गया।
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने 383 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की, जिसमें 39 गवाहों के बयान, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्य शामिल किए गए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने मीनाक्षी शर्मा की जमानत याचिका मंजूर कर ली। अदालत के आदेश के बाद अब जमानत की शर्तें पूरी होने पर उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय हत्याकांड का ट्रायल जिला एवं सत्र न्यायालय में जारी रहेगा और अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर सुनाएगी। भारतीय कानून के अनुसार, जब तक अदालत दोष सिद्ध नहीं करती, तब तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है।

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